ख़ुशियाँ अपार है, इस जालिम संसार में,
ढूँढो तो मिल जायेगी, कई-कई हजार में,
न रुपयों की जरुरत है, न धन-दौलत की,
सिर्फ एक प्रयास करो, अच्छे व्यवहार की।
मिलाने को हाथ बढ़ाओ, छुड़ाने को नहीं,
हँसाने को ज़ुबान हिलाओ, रुलाने को नहीं,
बात को न बढ़ने दो, अब अपनी तकरार में,
सिर्फ एक अच्छाई लाओ, खुद के व्यवहार में।
गला काटने को बैठे सभी, खंजर लिए हाथ में,
ख़ुशियाँ नदारत हो जाती है, नफ़रत के बाजार में,
भाईचारे का संदेश फैलाओ, तुम इस संसार में,
सिर्फ एक अच्छाई लाओ, खुद के व्यवहार में।
ख़ुशियाँ लौट आयेगी, थोड़े से इकरार में,
ढूँढो तो मिल जायेगी, बस फिर इजहार में,
दौलत होगी शोहरत होगी, मान और सम्मान भी,
तुम जरा कोशिश कर लो, इस जुल्मी संसार में|
