Shayriyon ka Karan

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ना जाने लोग ये दर्द-ए-इश्क सहते क्यों हैं?
मेरे दिल के ज़ख्म कलम है मेरी शायरियों के इस गलत फ़हमी में रहते क्यों हैं?
और मैं तो सिर्फ लिखता हूं किसी की जिंदगी अपने ख्यालों की कलम से|
ना जाने लोग इसे शायरी क्यों कहते हैं?

Jeevan ek shayarWhere stories live. Discover now