नज़ारे भूल आई हूँ मैं दुनिया के सभी..
तेरी बाँहों के आगे कुछ नही दिखता मुझको..
#दिया
मैं घूम कर आई हूँ ये दुनिया सारी..
तेरी आँखों जैसा नूर कहीं भी नहीं...
#दिया
उड़ाने भर रहा है दिल मेरा..
उसकी चाहत ने मुझे पंख दिये हैं..
#दिया
बखूबी जानता है वो मेरे ज़ख्म भरने का हुनर..
वो बस मुस्कुरा के मुझे रूह तक छू लेता है...
#दिया
वो यूँ ही मरहम का काम करता रहा..
मैं बाँहों में थी उसकी वो मेरा ज़ख्म भरता रहा..
#दिया
मैं अंजाने में ज़ागीर हो गई उसकी..
वो आया मुझे सबसे चुराकर ले गया..
#दिया
महज शर्माई मैं कुछ कर न सकी..
वो मेरे हर रोम पर अपना नाम दर्ज कर गया..
#दिया
कोई वकील करवाओ मुकदमा कराना है मुझको..
कोई मेरी साँसों पे कब्जा किये बैठा है..
#दिया
#मेरी नज़रें न उठ सकीं उस पल..
वो जिस पर होंठ मेरे छू कर गया..
#दिया
