आख़िरकार कल मै अपना 11th की पढ़ाई के लिए राजनगर पहुँच जाऊंगा,अभी आरव डायरी लिख ही रहा था कि उसके माँ ने खाने के लिये बुला लिया,आरव ने डायरी लिखना बन्द करके नीचे खाने की टेबल पे पहुँच गया।
"और सारी तैयारी हो गयी तुम्हारी"उसके पापा ने पूछा
"जी पापा लगभग सभी तैयारियां हो गईं है"
"वहां जाके पढ़ाई करना ज्यादा दोस्तों के साथ घूमना फिरना मत"
"जी पापा"
आरव ने खाना खत्म किया और फिर सोने के लिए चला गया।
फिर सुबह उठ के उसने अपना बैग पैक करके नीचे उतरा और सबको गुड बाई बोलके पापा के साथ स्टेशन के लिए निकल गया।उसने अपना सामान अपने बर्थ पे रखा और पाप को बाई बोलने के बाद अपने सीट पे आके बैठ गया।
5 घंटे के सफर के बाद में आख़िरकार राजनगर पहुँच गया।आरव राजनगर में अपने दोस्त रवि के यहाँ रहने वाला था।रवि और आरव8th क्लास तक साथ मे पढ़ते थे।रवि हमेशा की तरह लेट होगया था आने में।तोह तबतक आरव स्टेशन से बाहर आके उसका इंतजार कर रहा रहा।
तभी उसने अपने सामने एक अजीब सी घटना देखी।कुछ बूढ़े लोग बात कर रहे थे कि वो लोग वापस आ चुके है,और यह कत्ल भी उन्ही में से किसी ने की है।यह सुनते ही आरव चौक गया और ज्योहीं ही वो उनसे पूछने जा रहा था कि तभि एक आवाज आई।
"आरव रॉय"उसने पीछे मुड़कर देखा तोह रवि उसके सामने खड़ा था।
"मुझे तो लगा कि तेरा एक्सीडेंट होगया"आरव ने कहा
"क्यों"
"क्योंकि साले तू बहुत जल्दी आगया"
"ओ!सॉरी सॉरी, अब चले"
और इतना कहते ही रवि ने आरव का बैग उठाया और ऑटो पे बैठ गया।
बीच रास्ते मे आरव ने रवि को बताया कि उसने कुछ कत्ल के बारे में सुना है,पर रवि ने बात को बकवास बोलके बात बदल दी।
बातों बातों में रवि और आरव,आरव के घर पहुँच गए।रवि का घर दो मंजिल का था।दोनो मंजिल में दो-दो कमरे और attach बाथरूम था।आरव ने ऊपर वाला कमरा पसंद किया।और फिर सभी सामान को रख कर आरव और रवि निचे उतरे जहाँ पर आरव की नौकरानी खाना बना कर टेबल पर लगा रही थी।आरव और रवि ने खाना खाया और दोनों अपने अपने कमरो में चले गए।
रात के 12बजे आरव की नींद अचानक से खुली।आरव को प्यास लगी थी इसलिय वो नीचे किचन की तरफ बढ़ा और पानी पीके ज्यों ही वो ऊपर आने लगा उसे दरवाजे के तरफ से एक चीख़ सुनाई दी।उस चीख़ को सुनते ही आरव जल्दी से दरवाजे की तरफ दौरा और जल्दी से दरवाजा खोल कर बाहर निकला।
वो पूरी सरक सुनसान थी,आरव को लगा कि उससे गलतफहमी हो गयी है।तभी उसने सामने से एक 30वर्षीय आदमी को आते देखा।
आरव ने पूछा"आप ठीक तोह है ना?"
"हाँ में ठीक हु,पर तुम यहाँ इतनी रात को क्या कर रहे हो"
"जी मैंने एक चीख़ सुनी इसीलिये बाहर आके देख रहा था"
आरव की यह बात सुनते ही वो आदमी मुस्कुराते हुए बोला"यह राजनगर है मेरे दोस्त यहाँ ऐसे कई चीख़ सुनाई देगी,यह तोह बस सुरुआत है"
यह सुनते ही आरव चौक गया और उसने पूछा"मतलब?"
लेकिन वो आदमीे बिना कुछ कहे वहाँ से चला गया था।तभी आरव ने उस आदमी के गर्दन के पास एक निसान देखा और ज्योंही वो उसका पीछा करना सुरु करता की उसके पीछे से एक आवाज आई
"कहाँ जा रहा है बे तू इतनी रात को"यह आवाज रवि की थी
"कही नही बस यूँही टहल रहा था"यह कह के आरव घर मे घुस गया"।
अगले सुबह रवि और आरव तैयार हो के कॉलेज के लिए निकले।ज्योंही आरव और रवि कॉलेज में घुसे उनको पीछे से किसी ने धक्का दिया और दोनो गिर गए।उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तोह सामने सौर्य मित्तल और उसका चमचा कपिल मंडल खरे थे।
सौर्य आरव की तरफ हँसते हुए बोला"सॉरी प्रैंक था"
आरव को बहुत गुस्सा आया और उसने तुरंत उठके सौर्य को कस के एक घुसा लगा दिया।सौर्य बिल्कुल गुस्से में आगया और उसने आरव का कालर पकड़ कर कहा
"साले तू जानता नही है मुझे"सौर्य ने कहा
"मुझे जानना भी नही"रवि ने कहा
"तू जिस जमीन पे खड़ा है ना वो मेरे बाप की है"
"मैं जिस जमीन पे खड़ा हूँ वो इस स्कूल की है"
इन दोनों की लड़ाई हो ही रही थी कि तभी कॉलेज का पिऊन दोनो को पाकर लिया और एक दूसरे से अलग कर दिया।
सौर्य ने कहा"देख लूंगा तुझे"
"देख लेना"रवि ने कहा "
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Vicious Companion
VampireWhen Aarav Went into Rajnagar he found some mysterious things.
