Baatein

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बातों में बात आ जाती है, फिर एक बात याद आ जाती है।
इन बातों की कोई सीमा नहीं रह जाती है,

कभी दिल से तो कभी दिमाग से निकलती,
बातों में बात आ जाती है, फिर एक बात याद आ जाती है।

यादों से जुड़ी हुई बाते दिल को हँसा जाती है तो कभी रुला जाती है, कभी हँस कर तो कभी रोकर बाते याद आ जाती है,
बातों में बात आ जाती है, फिर एक बात याद आ जाती हैं।

इन बातों का क्या है, शुरू तो होती है पर खत्म होना भूल जाती है।

चिडियों के चे - चेहाने से, शेर के धहाड़ने तक बातें अपने आप बन जाती है।

बातों में बात आ जाती है, फिर एक बात याद आ जाती है।

कुछ बातें दिल को छू जाती हैं तो कुछ तोड जाती है।
बातों के बारे में सोचो तो बातें बढ़ जाती हैं और न सोचो तो बिगड़ जाती है,
इन बातों का क्या है शुरू तो होती है पर खत्म होना भूल जाती है।

कुछ बातें बिना मतलब की होती है, तो कुछ ज़िन्दगी के माऐने समझा जाती है।

इन बातों का क्या है शुरू तो होती है पर खत्म होना भूल जाती है।

कभी बैठकर सोचो तो ये बातें शुरू कैसे होती हैं,
फिर सोचो की ये खत्म कैसे होती हैं।
अगर ज़ुबान से निकले तो सच हो जाती है,
मन्न में रह जाए तो घाव बन जाती हैं।

इन बातों का क्या है शुरू तो होती है,
पर खत्म होना भूल जाती है,
बातों में बात आ जाती है,
फिर एक बात याद आ जाती है।

कभी ज़िन्दगी में मिश्री की तरह घुल जाती है,
तो कभी ज़िन्दगी को काटों के रास्ते पर ले जाती है।

बातों में बात आ जाती है,
फिर एक बात याद आ जाती हैं।

"ये बातें तो ज़िंदगी का एक हिस्सा है, मगर ये एक ऐसा पल है जो ज़िन्दगी को ही बदल देता है। कभी रूककर, कभी चलकर, कभी दौड़कर ये मंज़िलों की तरफ ले चलती है, नए रिश्ते नए दौर जोड़ देती हैं।
बातों से बातें बनती है इनसे किससे बनते हैं और ज़िन्दगी को पूरा करते हैं।
हाँ ये सही है कि ये बातें ही है जो रिश्तों को बिगाड़ ती है तो कभी सवारती है।........ "

Trail LifeWhere stories live. Discover now