अर्जुन का पुत्र में, श्री कृष्ण का भांजा हूं
सुभद्रा मेरी माता, कुंती का में पोता हूं
सीखा चक्रव्यूह भेदना , मां की कोख में
में ऐसा बुद्धिमान था,
लड़ा अकेला हजारों कौरवों से , में ऐसा वीर बलवान था,
भुजाएं मेरी भीम गदा सी, मुंह सूर्य सा तेजवान था,
हाथ में पिता अर्जुन की धनुर शिक्षा, सर पे मामा कृष्ण का आशीर्वाद था,
मौत मेरी निश्चित थी,हां मुझको उसका आभाश था ,
रचा चक्रव्यूह द्रोणा ने , पर मुझमें भी उनका अंश था,
उम्र मात्र सोलह थी, युद्ध छलों से में अनजान था,
मारने मुझे सब टूट पड़े , क्या पांडव होना मेरा अपराध था,
में वीर अकेला ही लड़ा सात सात के साथ था,
वीरगति को पा गया, में योद्धा वीर महान था,
में योद्धा वीर महान था..!!
