परिचय

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ज़िंदगी बहती रहती है,कभी एक सी नहीं रहती। कभी शहद से मीठे पल जीते हैं हम और कभी ज़हर से कड़वे घूँट भरने पड़ते हैं।कभी-कभी शब्द कम पड़ जाते हैं मगर हम अपने दिल की बात बयान नहीं कर पाते, और कभी दो लफ़्ज़ों में हो जाती है दास्तान मुकम्मल।कुछ ऐसा ही है यह संकलन, कुछ खट्टा कुछ मीठा,कुछ कड़वा कुछ तीखा.....

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