सपने की परी

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इक प्यारी सी तस्वीर थी मन मे,

चाहत के सपने थे,,

परी जो ख्वाबो की थी

मेरी जिंदगी से जूडी थी,,

मेरे सपनो मे आती थी..!

तमन्ना थी पाने की

अपने दिल से लगाने की,

अपने सपने दिखाने की

सब कुछ सोचा था

पर दिल को रोका था..

उसे देख मुस्कुराहट आ जाती थी..

मेरे सपनो मे जो आती थी..!

खिल उठा कमल सा

जीवन महका सावन सा,,

हर रंग मे प्यार भरा

मेरा संसार चला

पाकर उसको, उसका प्यार..

जो सपनो मे आती थी

मुझे हसां जाती थी,

खुश रहती, खुश रखती

मेरे सपनो मे जो आती थी..!

गोरा सा रंग सुनहला

पतली सी लम्बी नाक

कजरारी तीखी आंखे,

हिरनी जैसी उसकी चाल..

जितने नखरे करती वो

प्यार उतना ही बढ जाता

मै उतना पागल हो जाता..

प्यार मे उसके खो जाता..!

वो मिल जाती फिर-

सपनो मे..

हस-हस  कर बाते करती

कुछ अपनी कहती,

कुछ मेरी सुनती

बहुत प्यार फिर मुझको करती..

साथ मेरे सपनो मे रहती..

तंग मै उसको थोडा करता

बात न उसकी जब सुनता,

वो गुस्से से बैठ जाती

मुझसे थोडा रूठ जाती,,

बडे प्यार से उसे मनाकर

गोद मे अपने उसे बिठाकर,

बाहो के झुले मे झुलाकर

प्यारी सी लोरी सुनाकर,,

संग सपनो मे खो जाता उसके

पास साथ ही रहता उसके..

सपनो मे फिर वो मिल जाती

मुझको अपने गले लगाती,

जब भी उसकी खुशबू मिल जाती

महक सा जाता मेरा जीवन

मन प्रफूल्लित हो जाता

तन चहककर गोते खाता..

और प्यार फिर बढता जाता..

उस प्यारी सी तस्वीर को देखकर

पाकर अपनी चाहत का सपना

मै मुस्कुरा देता कमल सा..

उस परी को पाकर..!

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