आरक्षण क्यों ?

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(खुला पत्र)

जाति के नाम पर आपने हम 85% को तिरिस्कार की नजरों से देखा आज भी आप हमे अपने साथ लेकर नहीं चलना चाहते, आज भी आप की भाषा में हमारे लिये तिरस्कार दिखाई देता है. हमे नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं खोते. आपके पास ताकत थी रूतबा था तो आपने पीढी दर पीढी डंडे के बल पर हमसे बेगार कराई. हमे सढा गला खाने पर मजबूर किया. ज्ञान से दूर रखा. हमारी परछाई भी अगर आप पर पड जाती तो आप को गंगा स्नान करना पडता था. हम भेड बकरियों से भी गये गुजरे थे. आज आप बराबरी के ज्ञान की दुहाई दे रहे है, पर आप ही ने तो हमे अब तक ज्ञान से दूर रखा था. अगर हमारे कानों में ज्ञान का एक शब्द भी पड जाता तो कान में पिघला सीसा डाल देने का प्रावधान भी आप ने बना रखा था.

भला हो लोकतंत्र की उसने हमे इंसान समझा और आप जेसे लोगों को समझाया की हम भी आपकी तरह ही जीते जागते इंसान है कोई खतरनाक वाइयरस बेक्टीरिया नहीं की जिसे छूते ही आप या आप का धर्म नष्ट हो जायेगा. हमे वोट देने का अधिकार मिला और नेताओं को हमारी ताकत का पता चला और उन्हे हमारी खेरीयत की चिंता होने लगी...भले ही चिंता दिखावटी हो!

हमारी हजारों वर्षों की लाचारी और गरीबी से हमे उबरने में कुछ तो समय लगेगा ना! हमारे पास आज भी आपके जितना ज्ञान भले ही ना हो, पर इतना ज्ञान तो है ही की जिस नोकरी के लिये आवेदन किया है वो हम कर सके. पहले आपने हमे जाति के नाम पर प्रगति से वंचित रखा था..आज आप ज्ञान की दुहाई देकर हमे वंचित करना चाहते है. आज आप पढाई में लाखों खर्च करते है, अच्छे से अच्छे अंग्रेजी स्कूलों और कालेजों में पढते है, सबसे बेहतरीन शिक्षकों द्वारा हर विषय पर अलग से ट्यूशन लेते है. अब हम इतना पैसा कहां से लाये और आप की बराबरी करे. फिर भी हम बस इतना कहना चाहते है कि बस कुछ समय और दीजिये. उसके बाद आप से ज्ञान में भी बराबरी कर लेगे.

दलितों में जो गरीब है उन्हे आरक्षण देने की बात कहने वाले पहले बताये कि गरीब किस को बोलोगे. सरकार सिर्फ बीपीएल धारी को गरीब मानती है. बीपीएल क्या होता है कुछ पता है? जिसको एक रोटी का आसरा तक नहीं उस नंगे भूखे डरे और सहमे अपने लिये रोटी का इंतिजाम कर सके वो ही बहुत है. उसके पास तो खाने तक के लाले है वो क्या पढेगा और आप के हिसाब से क्या ज्ञान हासिल कर पायेगा... इतनी मंहगी शिक्षा वो अपने बच्चों को कैसे दे पायेगा ? जिस शिक्षा के माप दंड आपने बनाये है उसे हमारा गरीब हासिल कर ही नहीं सकता जब तक की उस पर आप की सीधे मेहरबानी ना हो जाये.