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एक गांव में एक स्त्री थी । उसके पती आई टी आई मे कार्यरत थे । वह आपने पती को पत्र लिखना चाहती थी पर अल्पशिक्षित होने के कारण उसे यह पता नहीं था कि पूर्णविराम कहां लगेगा । इसीलिये उसका जहां मन करता था वहीं पुर्णविराम लगा देती थी ।
उसने चिट्टी इस प्रकार लिखी-------- मेरे प्यारे जीवनसाथी मेरा प्रणाम आपके चरणो मे । आप ने अभी तक चिट्टी नहीं लिखी मेरी सहेली कॊ । नोकरी मिल गयी है हमारी गाय को । बछडा दिया है दादाजी ने । शराब की लत लगा ली है मैने । तुमको बहुत खत लिखे पर तुम नहीं आये कुत्ते के बच्चे । भेडीया खा गया दो महीने का राशन । छुट्टी पर आते समय ले आना एक खुबसुरत औरत । मेरी सहेली बन गई है । और इस समय टीवी पर गाना गा रही है हमारी बकरी । बेच दी गयी है तुम्हारी मां । तुमको बहुत याद कर रही है एक पडोसन । हमें बहुत तंग करती है तुम्हारी बहन हमरे प्रोफ़ाईल पे आते है वो.... (ज़रा गौर फ़ारमाये...) हमरे प्रोफ़ाईल पे आते है वो............ (वाह-वाह...) और एक स्कैप भी नही करते, जाते है वोह्.... (क्या बात है...) इतना भी नही मालूम ज़ालिम को.... (बात की गहरायी देखिये...) रीसैन्ट विसिटर्स मै दिख जाते है वोह (कमाल हो गया...)!!!!!!! जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की. देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में.. येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज.. दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में.. नाम की तो जरूरत हई नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी.. पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में.. कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी.. दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में.. सिर्फ़ भ्रम हे कि दोस्त होते ह अलग-अलग.. दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में.. माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये "अभी" पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में.. ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि.. भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती हमारे profile पर आते है वो, हमारे profile पर आते है वो, हमारे profile पर आते है वो, और एक scrap भी नही छोड जाते वो, इतना भी नही मालूम जालिम को, RECENT VISITORS मे दिख जाते है वो, जब भी लिखो जी भर के लिखना जुबान की नहीं बस दिल की बात लिखना. हमने देखा है दिल की बात जब दिमाग से होकर जुबान पर आती है तो बात बिल्कुल बदल जाती है यह अलग बात है जमाने को वही पसंद आती है. कविता तो कवि का है शाश्वत धरम सत्य प्रदर्शीत करने में फिर कैसी शरम एक बार फिर दिल के ख्यालों को कविता के आईने में दिखा दो इस बदलती दुनिया को जीने के कुछ ढ़ंग सिखा दो. एक ख्याल कुछ ऐसा आज फिर से लिखना जैसी अंधेरी राहों में चाँद का हो दिखना. जब भी लिखो जी भर के लिखना जुबान की नहीं बस दिल की बात लिखना. घुघुती ना बासा, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा। तेर घुरु घुरू सुनी मै लागू उदासा स्वामी मेरो परदेसा, बर्फीलो लदाखा, घुघुती ना बासा घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा। रीतू आगी घनी घनी, गर्मी चैते की याद मुकू भोत ऐगे अपुना पति की, घुघुती ना बासा घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा। तेर जैस मै ले हुनो, उड़ी बेर ज्यूनो स्वामी की मुखडी के मैं जी भरी देखुनो, घुघुती ना बासा घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा। उडी जा ओ घुघुती, नेह जा लदाखा हल मेर बते दिये, मेरा स्वामी पासा, घुघुती ना बासा घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा। ...... .:. इस छोटी सी जिन्दगी के, गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ, सबको अपना कह सकूँ, ऐसा ठिकाना चाहता हूँ, टूटे तारों को जोड़ कर, फिर आजमाना चाहता हूँ, बिछुड़े जनों से स्नेह का, मंदिर बनाना चाहता हूँ. हर अन्धेरे घर मे फिर, दीपक जलाना चाहता हूँ, खुला आकाश मे हो घर मेरा, नही आशियाना चाहता हूँ, जो कुछ दिया खुदा ने, दूना लौटाना चाहता हूँ, जब तक रहे ये जिन्दगी, खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ IN HINDI;- बहुत दिन हुए वो तूफ़ान नही आया, उस हसीं दोस्त का कोई पैगाम नही आया, सोचा में ही कलाम लिख देता हूँ, उसे अपना हाल- ए- दिल तमाम लिख देता हूँ, ज़माना हुआ मुस्कुराए हुए, आपका हाल सुने... अपना हाल सुनाए हुए, आज आपकी याद आई तो सोचा आवाज़ दे दूं, अपने दोस्त की सलामती की कुछ ख़बर तो ले लूं जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है, जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है, ना मा, बाप, बहन, ना यहा कोई भाई है. हर लडकी का है Boy Friend, हर लडके ने Girl Friend पायी है, चंद दिनो के है ये रिश्ते, फिर वही रुसवायी है. घर जाना Home Sickness कहलाता है, पर Girl Friend से मिलने को टाईम रोज मिल जाता है. दो दिन से नही पुछा मां की तबीयत का हाल, Girl Friend से पल-पल की खबर पायी है, जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है..... कभी खुली हवा मे घुमते थे, अब AC की आदत लगायी है. धुप हमसे सहन नही होती, हर कोई देता यही दुहाई है. मेहनत के काम हम करते नही, इसीलिये Gym जाने की नौबत आयी है. McDonalds, PizaaHut जाने लगे, दाल-रोटी तो मुश्कील से खायी है.
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